यह लेख जान बुझकर हिंदी में लिख रहा हूँ, वरना लेख से वोह गहराई चली जायेगी...
लेख का शीर्षक है "हम ऐसे ही हैं"
- रात को १ बजे घर लौटे थे हम| चाबी हथेली में दबाए हुए आये थे| फिर भी घर की घंटी बजा दी, ताकि सिर्फ ये देख सकें की आज माँ कैसी है| उसकी एक हलकी सी डांट सुनके सोए जब, तब यह ख़ुशी मिली की कोई है जो घर देर से आने पे हमें फटकार लगाता है| सिर्फ कोई है जो गुस्से में भी प्यार जताता है....
- बचते बचाते गाडी चलाते हैं बम्बई की गलियों से हर बार| पर रफ़्तार १०० के आस पास ही होती है| किसी दिन लोग कहते हैं कुछ कर बैठेंगे हम| हम कहें उस दिन का इंतज़ार करने का क्या फायदा, जो शायद कभी आएगा जीवन में| उस दिन के इंतज़ार में आज को नहीं छोड़ सकते हम...
- बरसात यूँ हमें भाति नहीं, कभी कबार बिलकुल सही जाती नहीं| पर हरयाली जो देख लें अगर इस बार, मन कहता है यह बरसात ग्रीष्म में आती क्यूँ नहीं?
- कुल्फी फलूदा अगर मेज़ पर सजा हो तोह दुनिया भर की आइसक्रीम भी हमें भाति नहीं|
- मैरीन ड्राइव के समुद्री तट पे एक शांत तथा सुकुनदायक शाम अगर मिल जाए तोह उसपर हजारों कलाचित्र वारे जा सकते हैं|
- दोस्ती उन्ही से करते हैं हम जो हमपर और हम जिस पर एक अजीब छाप छोड़ देते हैं|
- ऐसा नहीं की हम इश्वर का ध्यान नहीं करते हर रोज़| सिर्फ मानना यह है की हर जीवित वस्तु में इश्वर है,और हर रोज़ मंदिर जाने से हम लाडले नहीं होजाएंगे|
- कर हर मनुष्य का कर्त्तव्य है| पर उससे ज्यादा जरूरी है की हम अपने साथ कर करने वालों के विकास में जान लगा दें| हम मानते हैं अच्छा नेता वोह नहीं जो हमेशा आगे चले, अच्छा नेता वोह है जो अगर कभी हार जाए तोह उसकी जगह लेने वाला उसने तैयार कर रखा हो|
और भी कई पहलु हैं इस तुच्छ जीवन के जो समय रहते इसी जगह अंकित करते रहेंगे हम| क्यूंकि हम ऐसे ही हैं|
Monday, August 3, 2009
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3 comments:
ऐसे ही हैं आप , अजीब और अनोखे ...
और भी लिखते रहिएगा... पढ़नेवाले भी बहुत हैं, अजीब भी और अनोखे भी ! :)
aacha likha hai aapne, humein to katai andaza hi nahin tha ki aapki hindi mein bhi likhte hain
@Ko: अजीब तो हैं हम, अनोखे भी कई चीज़ों में ... और थोड़े से अच्छे भी हैं...बस इन्हें इस्तमाल नहीं करना आता... :-)
@Go: हम हिंदी में कई बार लिखते हैं... just makes me feel at home...
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