Monday, August 3, 2009

हम ऐसे ही हैं

यह लेख जान बुझकर हिंदी में लिख रहा हूँ, वरना लेख से वोह गहराई चली जायेगी...

लेख का शीर्षक है "हम ऐसे ही हैं"

- रात को १ बजे घर लौटे थे हम| चाबी हथेली में दबाए हुए आये थे| फिर भी घर की घंटी बजा दी, ताकि सिर्फ ये देख सकें की आज माँ कैसी है| उसकी एक हलकी सी डांट सुनके सोए जब, तब यह ख़ुशी मिली की कोई है जो घर देर से आने पे हमें फटकार लगाता है| सिर्फ कोई है जो गुस्से में भी प्यार जताता है....

- बचते बचाते गाडी चलाते हैं बम्बई की गलियों से हर बार| पर रफ़्तार १०० के आस पास ही होती है| किसी दिन लोग कहते हैं कुछ कर बैठेंगे हम| हम कहें उस दिन का इंतज़ार करने का क्या फायदा, जो शायद कभी आएगा जीवन में| उस दिन के इंतज़ार में आज को नहीं छोड़ सकते हम...

- बरसात यूँ हमें भाति नहीं, कभी कबार बिलकुल सही जाती नहीं| पर हरयाली जो देख लें अगर इस बार, मन कहता है यह बरसात ग्रीष्म में आती क्यूँ नहीं?

- कुल्फी फलूदा अगर मेज़ पर सजा हो तोह दुनिया भर की आइसक्रीम भी हमें भाति नहीं|

- मैरीन ड्राइव के समुद्री तट पे एक शांत तथा सुकुनदायक शाम अगर मिल जाए तोह उसपर हजारों कलाचित्र वारे जा सकते हैं|

- दोस्ती उन्ही से करते हैं हम जो हमपर और हम जिस पर एक अजीब छाप छोड़ देते हैं|

- ऐसा नहीं की हम इश्वर का ध्यान नहीं करते हर रोज़| सिर्फ मानना यह है की हर जीवित वस्तु में इश्वर है,और हर रोज़ मंदिर जाने से हम लाडले नहीं होजाएंगे|

- कर हर मनुष्य का कर्त्तव्य है| पर उससे ज्यादा जरूरी है की हम अपने साथ कर करने वालों के विकास में जान लगा दें| हम मानते हैं अच्छा नेता वोह नहीं जो हमेशा आगे चले, अच्छा नेता वोह है जो अगर कभी हार जाए तोह उसकी जगह लेने वाला उसने तैयार कर रखा हो|

और भी कई पहलु हैं इस तुच्छ जीवन के जो समय रहते इसी जगह अंकित करते रहेंगे हम| क्यूंकि हम ऐसे ही हैं|

3 comments:

Daffodils said...

ऐसे ही हैं आप , अजीब और अनोखे ...
और भी लिखते रहिएगा... पढ़नेवाले भी बहुत हैं, अजीब भी और अनोखे भी ! :)

DK said...

aacha likha hai aapne, humein to katai andaza hi nahin tha ki aapki hindi mein bhi likhte hain

Arth said...

@Ko: अजीब तो हैं हम, अनोखे भी कई चीज़ों में ... और थोड़े से अच्छे भी हैं...बस इन्हें इस्तमाल नहीं करना आता... :-)

@Go: हम हिंदी में कई बार लिखते हैं... just makes me feel at home...