एक था अपना चतुर मेनेजर
फिरता था ना जाने इधर उधर
सवेरे जाता काज को, रात को मिलता समाज को
जीवन उसका अजीब था, पैसे थे फिर भी वोह गरीब था
सिमट गयी थी सारी ज़िन्दगी सप्ताहांत तक
इंतज़ार करता खुदका वोह एकांत तक
MS Outlook ने लेली उसकी जान
Orkut से था वोह हैरान परेशान
Gmail ने G1 करदिया बिगाड़
Gtalk ने बना दिया एक भद्दा मज़ाक
Facebook जो शुरू किया तो दुनिया भूल गया
क्या करदिया उसने जो सारा वातावरण ही बदल गया?
जब ना था यह मेनेजर, बादल को देख कर होता यह आकर्षित
झील झरने नदियाँ सब इसे लगती थी विचित्र
दोस्त तब थे सबके सब निस्वार्थ
जीवन में हर दिन निकलता था इक नया अर्थ
समय का ना पता चलता था जब
कहाँ गये वो दिन सारे अब?
क्यूँ होगया जीवन उसका 9 to 6 अब?
क्या मेनेजर बनना सबसे बड़ी गलती थी?
क्यूँ बना मेनेजर वोह जब बात यह उसे खलती थी?
आखिर क्यूँ?
Monday, January 25, 2010
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3 comments:
Wah Atku Wah mere aligarh ke sher
Waah Waah Gogone! Tu to shayar ho gaya :P
U r too good gagan ! Never knew u were so talented :)
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